हरी के बिना कोन गरीब को बेली | Hari Ke Bina Kon Garib Ko Beli Lyrics

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हरी के बिना कोन गरीब को बेली ,
हरी के बिना कोन गरीब को बेली ,
धनवाले धन देख फुलाये ,
बांधे  महेल हवेली ,
दान धरम दया नहीं दिलमे ,
आये अनीति फैली ,
नाम करण को दान करत है ,
मन में निष्ठां मिली ,
पापी पाखंडी को ये पूजे ,
बनकर चेला चेली ,
नाटक देखे नाच नचावे ,
खाली करे नित थेली ,
उनको सत्य सुज़े नही जिनके ,
जिनके बाप ताई माँ तेली ,
दो रंगी दुनिया के अंदर ,
देखि भेला भेली ,
दास सतार कोई एक धर्मी ,
बाकि दुनिया घेली ,
Hari Ke Bina Kon Garib Ko Beli Lyrics
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