एक बार श्री भोले भंडारी | Ak Bar Shri Bhole Bhandari Lyrics | Bhajanbook

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एक बार श्री भोले भंडारी बनकर ब्रिजकी नारी गोकुल में आ गये ।
पार्वतीने मना किया पर ना माने त्रिपुरारी गोकुल में आ गये ।।

पार्वती से बोले भोले मे भी चलूँगा तेरे संगमे ।
राधे संग श्री कृष्ण नाचे , में भी नाचूंगा तेरे संगमे ।
रास रचेगा व्रज में भारी , हमें दिखादे प्यारी ।। गोकुल में ।।

औ मेरे भोले बाबा कैसे ले जाऊ तुम्हे रासमे ।
मोहन के सिवा कोई ना जावे उस रासमें ।
हांसी करेगी व्रज की नारी , मानो बात हमारी ।। गोकुल में ।।

ऐसे सजादे मुझको , कोई ना जाने इस राजको ।
ये हे साहेली मेरी , ऐसे बताना ब्रज राजको ।
तानके गजरा बांध के साडी , चाल चले मतवाली । गोकुल में ।।

ओ मोरे भोले बाबा में तो वारी जाऊ इस रूपमे ।
एक दिन मोहनस्वामी आही गये इस भेष में।
पहेली बारी मोहनकी थी , अबकी बारी तुम्हारी । गोकुल में ।।

ऐसी बजायी बंसी शुद्ध बुद्ध भूले भोलेनाथजी ।
आयी गये है शंभु समज गई सब व्रज नार रे ।
खीचक गयी जब शिरसे साडी , मुस्कुराये बनवारी । गोकुल में ।।

ओ मोरे भोले स्वामी तभीसे पड़ा बृन्दावन धामरे ।
ओ मोरे भोले बाबा पडारे गोपेश्वर नाम रे ।
ताराचंद है चरण तिहारी , राखो लाज हमारी । गोकुल में ।।

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