वोही मेरा श्याम है | Vohi Mera Shyam Hai Lyrics | Narayan Swami | Bhajanbook Lyrics

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वोही मेरा श्याम है , नैनो मत वाले है ।
बाल घूंघर वाले है , बोल प्यारे प्यारे है ।
नाम बनवारी है , वो ही मेरा श्याम है ।।

कहा घनश्यामने ओधव को ज़रा बृदावन को जाना ।
वहांकी गोपिओ को , ज्ञान का कुछ तत्व बतलाना ।
विरहकी बेदनामे वे सदा बेचेन रहती है।
तड़पती आह भरती है , सदा रो रो के कहती है ।
वोही मेरा श्याम है ।।

हसकर कहा ओधवने में अभी जाता हु वृन्दावन ।
वहा जाके देखता हु केशा अनोखा है प्रेम का बंधन ।
यह कोनसी वो गोपिया जो ग्यान बलको को कम बतलाती है ।
और निर्थरक लोक लीला मै वृथा यही गुणगान गाती है ।
वोही मेरा श्याम है ।।

चले मथुरा से जब कुछ दूर बृन्दावन निकट आया ।
वहा की प्रेम नगरी मे अनोखा रंग दिखलाया ।
उलजकर वस्त्रमे कांटे लगा ओधव को समजाने ।
तुम्हारा ग्यान का परदा चिर देंगे हम प्रेम दीवाने ।
विटप झुक झुक कर कह रहे थे इधर आवो ।
पपिया कह रहाथा पी कहा है कोई तो बतलाओ ।
नदी यमुनाकि धारा यही किलकार करतीथी ।
सुनातिथि ब्रम्हर गुंजार और मधु बनसे मधुर आवाज़ आतिथि ।
वोही मेरा श्याम है ।।

बड़कर ओधवने कहा में मथुरा से आया हु ।
संदेशा में श्याम का सुनाता हु जो में साथ लाया हु ।
जब आत्म सताही अलख निर्गुण कहती है ।
तुम मोहवश कर वृथा यही गुणगान गाती हो ।
वोही मेरा श्याम है ।।

हसकर कहा श्री राधिकाने संदेशा खूब लाये हो ।
मगर याद रखो योगी , के तुम प्रेम नगरीमे आये हो ।
संभालो योग की पूंजी कही हाथोसे ना निकल जाए ।
तुम्हारी ज्ञानकी पोथी हमारी बिरहकी अग्निमे खाख न हो जाये ।

अलख हम तुम है तो लगती है नजर किसीसे किसीकी ।
और निर्गुण हम तुम है कौन खबर करता किसीसे किसीकी ।
खुद तुम नहीं समजे इसीको योग कहते है ।
सुनो इस तौर से योगी दैत में अद्वैत रहते है ।
सुना जब प्रेम का अद्वैत ओधव की खुल गई आँखे ।
पडीथी ज्ञान मद की धूल जिशने वहा धूलि आँखे ।
हुआ रोमांच तन अंदर बिंदु आंखोसे निकल आया ।
ओधव गीर श्री राधिका के चरणो मे और गुरु मंत्र यही पाया ।
वोही मेरा श्याम है ।।।

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