जपले हरी का नाम | Jap Le Hari Ka Nam Lyrics
जपले हरी का नाम ,मनवा जपले हरी का नाम ,
उसके नामसे बन जायेगे ,तेरे बिगड़े काम |
नाम वो धन है जो ,निर्धन को धनवान बनादे ,
नामही नरको नारायण की,एक पहेचान करादे...
वैष्णव जन तो | Vaishnav Jan To Tene Re Kahiye Lyrics | Narshih Maheta
वैष्णव जन तो तेने रे कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे
वैष्णव जन तो तेने रे कहिये जे पीड़ परायी जाणे रे
पर दुखे उपकार करे तोये मन अभिमान न आणे रे
सकल लोक...
अलख तूने खेल बनाया भारी | Alakh Tune Khel Banaya Bhari Lyrics
अलख तूने खेल बनाया भारी
गुरूजी तेरी लीला अपरंपारी ,
इस काया में पास तत्व है
दुग्धा उनमे नारी ,
पचीस प्रकृति साथ रखे वो
ऐसी है बिस्तारी ,
अलख तूने खेल बनाया भारी ,
पांच पचीस मिल...
जो आनंद संत फ़क़ीर करे | Jo Anand Sant Fakir Kare Lyrics
जो आनंद संत फ़क़ीर करे
वो आनंद नाही अमीरी में ,
सुख दुःखमें समता साध रखे
कुछ खौफ नाही जागीरी में ,
जो आनंद संत फ़क़ीर करे ।
हर रंग में सेवक रूप रहे
अम्रित जल का...
मंगल भवन अमंगल हारी | Mangal Bhavan Amangal Hari Lyrics
मंगल भवन अमंगल हारी ,
द्रबहु सुदसरथ अचर बिहारी ,
राम सिया राम सिया राम जय जय राम ,
हो, होइहै वही जो राम रचि राखा ,
को करे तरफ़ बढ़ाए साखा ,
हो, धीरज धरम...
श्री राम जानकी बैठे हैं मेरे सीने में | Shri Ram Janki Baithe Hai...
ना चलाओ बाण,
व्यंग के ऐ विभिषण,
ताना ना सह पाऊं,
क्यूँ तोड़ी है ये माला,
तुझे ए लंकापति बतलाऊं,
मुझमें भी है तुझमें भी है,
सब में है समझाऊँ,
ऐ लंकापति विभीषण, ले देख,
मैं तुझको आज दिखाऊं।।
श्री...
अलख मिलन के काज फकीरी | Alakh Milan Ke Kaj Fakiri Lyrics
अलख मिलन के काज फकीरी , लेके फिरू में जंगल में ,
तेरी सीकल के काज फकीरी , लेके फिरू में जंगल में ,
तुही तुही तार लगी दिल अंदर , रहु सदा...
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी | Shree Krishn Goving Hare Murari Lyrics
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी ,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ,
पितृ मात स्वामी, सखा हमारे,
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
श्री कृष्ण गोविन्द हरे मुरारी
हे नाथ नारायण वासुदेवा ॥
बंदी गृह के, तुम अवतारी ,
कही जन्मे,...
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी | Man Lagyo Mero Yaar Fakiri Lyrics
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में
जो सुख पाऊँ राम भजन में
सो सुख नाहिं अमीरी में
मन लाग्यो मेरो यार फ़कीरी में
भला बुरा सब का सुनलीजै
कर गुजरान ग़रीबी...
जगत में स्वारथ का व्यवहार | Jagat Me Swarath Ka Vyavhar Lyrics
जगत में स्वारथ का व्यवहार,
स्वारथ का व्यवहार जगत में,
स्वारथ का व्यवहार,
पूत कमाई कर धन ल्यावे,माता कर रही प्यार,
पिता कहे ये पूत सपूता,अकलमंद होशियार,
जगत में स्वारथ का व्यवहार (२) ,
नारी सुंदर वस्त्र...